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दुर्ग में दिव्यांग युवती से रेप की कोशिश: पिता का दोस्त दोषी करार, कोर्ट ने सुनाई 8 साल की कड़ी सजा

मोहन नगर थाना क्षेत्र का मामला; मूक-बधिर पीड़िता ने सांकेतिक भाषा में दी गवाही, अदालत ने कहा—भरोसे का दुरुपयोग करने वाले पर नरमी नहीं।

दुर्ग (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से न्याय की एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ की एक स्थानीय अदालत ने 19 वर्षीय दिव्यांग (मूक-बधिर) युवती के साथ दुष्कर्म का प्रयास करने वाले आरोपी को दोषी ठहराते हुए कुल 8 साल की सजा सुनाई है। जिला और अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (FTC) अवध किशोर की अदालत ने आरोपी तामेश्वर यादव को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत दंडित किया है।

क्या था पूरा घटनाक्रम? यह शर्मनाक घटना 8 अप्रैल 2025 की सुबह करीब 10 बजे की है, जब मोहन नगर थाना क्षेत्र में रहने वाली पीड़िता घर में अकेली थी। आरोपी तामेश्वर यादव, जो कि पीड़िता के पिता का मित्र था, घर में घुस आया और युवती के साथ जबरन छेड़छाड़ और दुष्कर्म का प्रयास करने लगा। पीड़िता ने इस दौरान अदम्य साहस का परिचय दिया; उसने आरोपी के हाथ पर काटा, उसे लात मारी और किसी तरह वहाँ से भागकर पड़ोसियों के घर पहुँचकर अपनी जान बचाई।

सांकेतिक भाषा में गवाही बनी जीत का आधार इस मामले की सुनवाई के दौरान सबसे चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण कड़ी पीड़िता की गवाही थी। चूंकि युवती मूक-बधिर थी, इसलिए उसकी गवाही कोर्ट में सांकेतिक भाषा (Sign Language) के माध्यम से दर्ज की गई। अदालत ने पीड़िता के बयान को पूरी तरह विश्वसनीय और सुसंगत माना। न्यायाधीश ने बचाव पक्ष के उन तर्कों को खारिज कर दिया जिनमें आरोपी को झूठा फंसाने की बात कही गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे संवेदनशील मामलों में पीड़िता की गवाही ही सजा के लिए पर्याप्त आधार है।

अदालत का कड़ा रुख और सजा का एलान न्यायालय ने आरोपी तामेश्वर यादव को भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 74 (महिला की मर्यादा भंग करना) के तहत 5 साल और धारा 75(2) (यौन उत्पीड़न) के तहत 3 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। ये दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इसके अलावा, अदालत ने आरोपी पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया है।

प्रभाव और विश्लेषण यह फैसला समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग, यानी दिव्यांगों की सुरक्षा के प्रति न्यायपालिका की गंभीरता को दर्शाता है। न्यायाधीश ने अपनी टिप्पणी में कहा कि आरोपी ने पीड़िता के पिता का दोस्त होने के नाते मिले भरोसे का दुरुपयोग किया, जो कि किसी भी स्थिति में नरमी के योग्य नहीं है। इस प्रकार के फैसलों से अपराधियों में कानून का भय पैदा होगा और पीड़ित परिवारों को न्याय के प्रति संबल मिलेगा

फिलहाल दोषी को जेल भेज दिया गया है। अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को यह निर्देश भी दिया है कि पीड़िता को उचित आर्थिक मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि वह इस मानसिक आघात से उबर सके और अपना जीवन गरिमा के साथ व्यतीत कर सके।

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