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शासकीय आदर्श महाविद्यालय में 100 लाख रुपये से अधिक का टेंडर घोटाला आया सामने, जांच रिपोर्ट में प्राचार्य की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जिसके बाद निलंबन की कार्रवाई की गई

रायपुर. छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग में जेम पोर्टल के माध्यम से की गई खरीदी में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का सिलसिला जारी है. ताजा मामला महासमुंद जिले के शासकीय आदर्श महाविद्यालय, लोहारकोट से सामने आया है, जहां पीएम उषा, रूसा मद से आवंटित राशि का उपयोग कर अक्टूबर-नवंबर 2025 में कुल 1 करोड़ 6 लाख रुपये से अधिक की सामग्री खरीदी गई. इस खरीदी में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई. (आदर्श महाविद्यालय में 100 लाख से ज्यादा का टेंडर घोटाला उजागर)

उच्च शिक्षा आयुक्त के आदेश पर गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें प्राचार्य डॉ. एस.एस. तिवारी की कार्यप्रणाली को संदेहास्पद बताया गया है. समिति ने आरोपियों के निलंबन और राशि की वसूली का प्रस्ताव दिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 1 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला हुआ है, जिसमें टेंडर नियमों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया.

कैसे हुआ घोटाला ?

महाविद्यालय को पीएम उषा मद से विभिन्न सामग्री खरीदने के लिए राशि आवंटित की गई थी। प्राचार्य डॉ. एस.एस. तिवारी ने 15 अक्टूबर, 22 अक्टूबर एक दिन में 29.63 लाख रुपये की 15 ऑर्डर और 31 अक्टूबर और 7 नवंबर 2025 को कुल 1,06,04,575 रुपये की सामग्री जेम पोर्टल से खरीदी है.

मुख्य अनियमितताएं

50,000 रुपये से अधिक की खरीदी के लिए शासन से अनुमति जरूरी थी, लेकिन अनुमति की प्रतीक्षा किए बिना खरीदी कर ली गई. छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियमों के अनुसार, इतनी बड़ी राशि के लिए जेम पोर्टल पर सीमित निविदा टेंडर आमंत्रित करना अनिवार्य था, लेकिन बिना निविदा के L1 lowest bidder मोड में सीधे खरीदी की गई.

सागर इंडस्ट्रीज, सिंघानिया ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज और ओशन इंटरप्राइजेस. यह तीनों फर्म जांजगीर के हैं, जिनसे अधिकांश खरीदी की गई है. संदेह है कि ये फर्में एक ही व्यक्ति परिवार की हैं.

क्रय समिति में गड़बड़ी

पिथौरा कॉलेज के सहायक प्राध्यापकों को सदस्य बनाया गया, जबकि महाविद्यालय के अपने अधीक्षकों को शामिल करना उचित होता है. दो महीने में 1 करोड़ से अधिक की खरीदी और तुरंत सप्लाई, यह प्रक्रिया संदेहास्पद है.

जांच समिति के मुताबिक, महाविद्यालय के प्राचार्य सहित क्रय समिति में अधिकारियों को निलंबित कर वसूली और आपराधिक जांच की अनुशंसा की गई है.

जांच समिति संयोजक डॉ. किशोर कुमार तिवारी, सदस्य डॉ. गोवर्धन यदु और महेश कुमार साहू ने 3 दिसंबर 2025 को कॉलेज में जांच की और दस्तावेजों का परीक्षण किया. रिपोर्ट में प्राचार्य की दोहरी जिम्मेदारी पिथौरा कॉलेज के भी प्रभारी

प्राचार्य पर भी सवाल उठाए गए हैं.यह मामला छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा विभाग में जेम पोर्टल खरीदी अनियमितताओं की श्रृंखला का हिस्सा लगता है. हाल ही में राजिम के राजीव लोचन पीजी कॉलेज में इसी तरह की धांधली पर प्राचार्य सहित 3-4 प्रोफेसर निलंबित किए गए. बिलासपुर के अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में भी एक ही फर्मों से करोड़ों की खरीदी की जांच चल रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि जेम पोर्टल पारदर्शिता के लिए बनाया गया था, लेकिन नियमों की अनदेखी से भ्रष्टाचार के नए रास्ते खुल रहे हैं.

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