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वनमंडल में रेंजर और डिप्टी रेंजर ने शासकीय राशि का गबन किया; जांच समिति की रिपोर्ट के बावजूद तीन महीने से कोई कार्रवाई नहीं हुई, गंभीर सवाल उठ रहे हैं

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही। मरवाही वनमंडल का नाम हमेशा से अपनी विवादित और नियमविरोधी कार्यशैली के लिए सुर्खियों में रहा है। ताजा मामला भी उसी दिशा में है, जिसमें मरवाही रेंज के तत्कालीन डिप्टी रेंजर रमेश रजक और रेंजर रमेश खैरवार के खिलाफ शासकीय राशि के गबन का आरोप सामने आया है। जानकारी के अनुसार, डिप्टी रेंजर रमेश रजक ने अपने इंजीनियर बेटे रवि कुमार रजक और पत्नी सरस्वती रजक के खातों में 2 लाख 31 हजार 720 रुपये जमा कराए, जबकि यह राशि असल में मजदूरी के लिए थी। इस पूरे फर्जीवाड़े में रेंजर रमेश खैरवार ने भी पूरी प्रक्रिया के दौरान हस्ताक्षर किए और कथित रूप से इसमें मदद की, जिससे यह मामला और गंभीर हो गया। मरवाही निवासी नारायण शर्मा ने इस मामले की शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी शिकायत के आधार पर गठित समिति ने जांच की और पाया कि दोनों अधिकारियों ने मिलकर मूल मजदूरों को भुगतान न करते हुए राशि अपने परिवार के खातों में डलवाने का कूट रचना किया।

जांच के बाद मुख्य वनसंरक्षक (CCF) बिलासपुर ने इस तथ्य को स्वीकार किया और DFO मरवाही को पत्र लिखकर डिप्टी रेंजर रमेश रजक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने और राशि वसूल करने के लिए निर्देशित किया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि बैंक सूची और अन्य दस्तावेजों का अध्ययन करने पर वास्तविक हेरफेर की राशि और अधिक स्पष्ट हो सकती है। फिर भी, तीन महीने बीत जाने के बावजूद कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है, जिससे कई सवाल उठ रहे हैं। जबकि, रेंजर रमेश खैरवार अभी भी मरवाही में पदस्थ हैं, वहीं डिप्टी रेंजर रमेश रजक वर्तमान में पेंड्रा रेंज में कार्यरत हैं। यह स्थिति वन विभाग के भ्रष्टाचार और कार्रवाई में देरी पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

CCF बिलासपुर मुख्य वनसंरक्षक मनोज पांडे ने इस मामले में बताया, “हमने समिति की रिपोर्ट के आधार पर वनमंडलाधिकारी मरवाही को कार्यवाही के लिए पत्र लिखा है। फिलहाल कार्यवाही क्यों नहीं हुई, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। एक बार फिर कार्यवाही के लिए पत्र भेजा जा रहा है।” गौरतलब है कि मरवाही वनमंडल लगातार विवादित भुगतान और नियम उल्लंघन के मामलों में चर्चा में रहा है। अब यह देखना बाकी है कि वन विभाग की उच्चाधिकारियों द्वारा कितनी शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई की जाती है, ताकि शासकीय धन का दुरुपयोग रोका जा सके और नियमों का पालन सुनिश्चित हो।

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