• Home
  • छत्तीसगढ़
  • मेडिकल पीजी प्रवेश को लेकर हाईकोर्ट का अहम फैसला, संस्थागत आरक्षण और ओपन कैटेगरी के लिए 50–50 फीसदी सीटों का होगा बंटवारा
Image

मेडिकल पीजी प्रवेश को लेकर हाईकोर्ट का अहम फैसला, संस्थागत आरक्षण और ओपन कैटेगरी के लिए 50–50 फीसदी सीटों का होगा बंटवारा

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने मेडिकल पीजी में एडमिशन को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने कहा कि संस्थागत आरक्षण के लिए 50 प्रतिशत सीटें, और ओपन मेरिट की 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेंगी.

साथ ही संस्थागत आरक्षण 50 प्रतिशत सीटों में शासकीय एवं निजी चिकित्सा महाविद्यालयों की कुल सीटें उन अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित रहेंगी, जिन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित एनएमसी द्वारा मान्यता प्राप्त चिकित्सा महाविद्यालयों से एमबीबीएस उत्तीर्ण किया है, अथवा जो सेवारत अभ्यर्थी है. कोर्ट ने यह भी कहा, कि इन सीटों पर प्रवेश केवल संस्थागत आरक्षण के पात्र अभ्यर्थियों के मध्य मेरिट के आधार पर दिया जाएगा. साथ ही गैर संस्थागत आरक्षण शेष 50 प्रतिशत सीटें ओपन कैटेगरी मानी जाएंगी. इन सीटों पर प्रवेश सभी पात्र अभ्यर्थियों हेतु राज्य स्तरीय मैरिट सूची के आधार पर किया जाएगा. ओपन सीटों पर किसी प्रकार की संस्थागत आरक्षण लागू नहीं होगी.

हाईकोर्ट ने यह भी व्यवस्था दी है कि यदि संस्थागत आरक्षण के तहत निर्धारित सीटों पर पर्याप्त पात्र अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होते हैं, तो मॉप-अप राउंड के दौरान इन खाली सीटों को ओपन कैटेगरी में परिवर्तित कर दिया जाएगा, ताकि सीटें खाली न रहें. बता दें, कि डॉ. समृद्धि दुबे ने याचिका दायर की थी कि वे छत्तीसगढ़ की मूल निवासी हैं, लेकिन उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई छत्तीसगढ़ से बाहर से की थी. उन्होंने स्नातकोत्तर प्रवेश नियमों में डोमिसाइल और संस्थागत वरीयता के नाम पर हो रहे भेदभाव को चुनौती दी थी. याचिका में कहा गया था कि पुराने नियमों के तहत उम्मीदवारों को दो वर्गों में बांट दिया गया है. एक वे, जिन्होंने छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस किया और दूसरे वे, जिन्होंने बाहर से डिग्री ली लेकिन राज्य के मूल निवासी हैं. इसे संविधान के समानता के अधिकार के खिलाफ बताया गया था.

राज्य सरकार ने 20 नवंबर 2025 को दिए गए हाईकोर्ट के आदेश के पैरा-21 को लेकर स्पष्टीकरण की मांग की थी. सरकार ने दलील दी कि संस्थागत वरीयता को लेकर आदेश को और स्पष्ट किया जाए. हालांकि, डॉ. समृद्धि दुबे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि किसी स्पष्टीकरण की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हाईकोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट के तनवी बहल प्रकरण पर आधारित है, जिसमें डोमिसाइल आधारित आरक्षण को असंवैधानिक बताया गया है.

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को दोहराते हुए कहा कि मेडिकल पीजी में निवास स्थान आधारित आरक्षण मान्य नहीं है, लेकिन सीमित दायरे में संस्थान आधारित आरक्षण स्वीकार्य है. इसी सिद्धांत के अनुरूप 50 प्रतिशत की सीमा तय की गई है. यह फैसला हजारों मेडिकल स्नातकों के भविष्य को सीधे प्रभावित करेगा. अब राज्य में पीजी मेडिकल प्रवेश को लेकर भ्रम की स्थिति खत्म होगी और एक समान, पारदर्शी व्यवस्था लागू होगी. साथ ही, डोमिसाइल के नाम पर होने वाले भेदभाव पर भी हाईकोर्ट के आदेश के बाद विराम लग गया है.

Releated Posts

अफीम की अवैध खेती पर बुलडोजर एक्शन, प्रशासन करेगा विनिष्टीकरण की कार्रवाई

दुर्ग. छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के समोदा में अवैध रूप से की जा रही अफीम की खेती मामले…

ByByNandni Manik Mar 9, 2026

भारत ने न्यूजीलैंड को हराकर तीसरी बार टी-20 वर्ल्ड कप जीता, रायपुर में जश्न का माहौल

रायपुर। टी-20 विश्व कप के फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड को 96 रनों से करारी शिकस्त…

ByByNandni Manik Mar 9, 2026

शादी का झांसा देकर कॉलेज छात्रा से बनाए शारीरिक संबंध, आरोपी गिरफ्तार

बिलासपुर. बिलासपुर के सरकंडा क्षेत्र में किराए पर रहकर पढ़ाई करने वाली युवती से दोस्ती कर युवक ने…

ByByNandni Manik Mar 9, 2026

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top