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खाकी और समाज की साझी पहल से कई जिंदगियों को मिला नया जीवन…

बस्तर। बस्तर की धरती खनिजों से लबालब है, लेकिन इसका लाभ ज़मीन के मालिकों तक नहीं पहुंच पा रहा। यहां लौह अयस्क, बॉक्साइट, टिन, डोलोमाइट, ग्रेफाइट, संगमरमर, सोना सहित 20 से अधिक खनिज मौजूद हैं। इसके बावजूद बस्तर विकास की दौड़ में पिछड़ा दिखाई देता है। खनिज दोहन सीमित है और अधिकांश संपदा जमीन के नीचे दबी है। कई इलाकों में चोरी-छिपे खनिज तस्करी की शिकायतें सामने आती रही हैं। बैलाडीला और रावघाट का लौह अयस्क विश्वस्तरीय गुणवत्ता का है।।अब नगरनार में अयस्क गलने से स्थानीय रोजगार की उम्मीद जगी है।

200 से अधिक सहायक उद्योगों की संभावना बताई जा रही है। लेकिन सवाल है क्या इसका सीधा लाभ स्थानीय युवाओं को मिलेगा? या फिर इतिहास की तरह संसाधन बाहर जाएंगे? बस्तर आज भी अमीर धरती गरीब लोग की पहचान से जूझ रहा है।

अयस्क तस्करी बनाम निगरानी व्यवस्था

दंतेवाड़ा। किरंदुल–बचेली मार्ग पर ओवरलोड लौह अयस्क परिवहन का मामला सामने आया है। शिकायत के बाद खनिज विभाग ने चार ट्रकों को जांच के लिए रोका। जांच में केवल एक ट्रक में तीन टन ओवरलोड पाया गया।।बाकी ट्रकों को मानक अनुरूप बताकर छोड़ दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा इससे उलट है। उनका कहना है कि सभी ट्रक ओवरलोड थे। ऐसे में कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।

क्या जांच सिर्फ औपचारिक थी?

या फिर कुछ वाहनों को राहत दी गई? पहले भी अवैध परिवहन के मामलों में कार्रवाई कमजोर रही है। प्रतिदिन सैकड़ों ट्रक अयस्क लेकर बाहर जाते हैं। निगरानी तंत्र की पारदर्शिता फिर कटघरे में है।

नदी के पास फिर टेलिंग्स डंपिंग की तैयारी

सुकमा। सुकमा में बैलाडीला टेलिंग्स डंपिंग को लेकर फिर हलचल तेज है। पिछले साल विरोध के बाद बंद हुआ डंपिंग स्थल दोबारा सक्रिय दिख रहा है। स्थानीय लोगों ने पोकलेन और हाइवा की मौजूदगी देखी है। डंपिंग स्थल शबरी नदी से मात्र 150 मीटर दूर है। यह नियमों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है। आसपास खेती योग्य जमीन भी मौजूद है। इससे मिट्टी और पानी प्रदूषण का खतरा है।

नगर पालिका से किसी तरह की अनुमति नहीं ली गई। पर्यावरण स्वीकृति को लेकर भी सवाल हैं। पहले सड़कें टूट चुकी हैं और जनता ने विरोध किया था। फिर वही हालात बनने की आशंका है। प्रशासन की चुप्पी चिंता बढ़ा रही है।

यूरेनियम और टिन तस्करी की परछाईं

दंतेवाड़ा। कटेकल्याण, तोंगपाल और पखनार क्षेत्र खनिज दृष्टि से संवेदनशील हैं। यहां टिन और लेपिडोलाइट का विशाल भंडार है। सूत्रों के अनुसार टिन से प्राप्त यूरेनियम की तस्करी लंबे समय से जारी है। कहा जा रहा है कि सामग्री हैदराबाद के रास्ते बाहर भेजी जाती है। तोंगपाल क्षेत्र में लिथियम की खोज ने चिंता और बढ़ा दी है। लिथियम आधुनिक तकनीक की रीढ़ बन चुका है। लेकिन सुरक्षा और नियंत्रण को लेकर स्पष्ट नीति नहीं दिखती। स्थानीय प्रशासन की भूमिका सवालों में है। खनिज सुरक्षा से जुड़ा मामला राष्ट्रीय महत्व का है। इसके बावजूद ठोस कार्रवाई नदारद है। क्या बस्तर फिर संसाधन लूट का केंद्र बनेगा? यह बड़ा सवाल बना हुआ है।

फाइलेरिया उन्मूलन की जमीनी तैयारी

जगदलपुर। बकावंड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर प्रशिक्षण हुआ। स्वास्थ्य अधिकारियों को अभियान की जिम्मेदारी सौंपी गई। बताया गया कि यह बीमारी मच्छर के काटने से फैलती है। इसके लक्षण वर्षों बाद सामने आते हैं। सामूहिक दवा सेवन सबसे प्रभावी उपाय है। गर्भवती महिलाओं और शिशुओं को दवा नहीं दी जाएगी।

10 से 25 फरवरी तक विशेष अभियान चलेगा। घर-घर जाकर दवा सेवन कराया जाएगा। सीएचओ और मितानिनों को अहम भूमिका दी गई है। जन-जागरूकता पर विशेष जोर रहेगा। लक्ष्य—फाइलेरिया मुक्त बस्तर। स्वास्थ्य विभाग ने पूरी तैयारी का दावा किया है।

एनएमडीसी सुरक्षा घोटाले की परतें

दंतेवाड़ा। एनएमडीसी की सुरक्षा में बड़ा घोटाला सामने आया है। निजी सुरक्षा कंपनी के कर्मचारियों ने वेतन में हेराफेरी की। करीब तीन साल तक लाखों की राशि गायब की गई। 30 से अधिक फर्जी नामों से वेतन निकाला गया। गार्डों ने खुद गबन की बात स्वीकार की।।इसके बावजूद केवल नौकरी से हटाने की कार्रवाई हुई। एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

कंपनी का कार्यकाल भी समाप्त हो चुका है। अब सुरक्षा व्यवस्था कई इलाकों में खाली है। प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। क्या दोषियों को संरक्षण मिला? मामला गंभीर लेकिन कार्रवाई अधूरी दिखती है।

शांति का संदेश देती अबूझमाड़ मैराथन

नारायणपुर। अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन 31 जनवरी को आयोजित होगी।नारायणपुर से बासिंग तक दौड़ का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री विजेताओं को पुरस्कार देंगे। मार्ग पर सौंदर्याकरण और सुरक्षा के निर्देश दिए गए हैं। 16 स्वागत प्वाइंट बनाए जाएंगे। 21 किलोमीटर की विभिन्न श्रेणियों में दौड़ होगी। बाहर से आने वाले प्रतिभागियों की विशेष व्यवस्था की जा रही है। पंजीयन शुल्क तय किया गया है। स्थानीय धावकों के लिए निःशुल्क पंजीयन है। कार्यक्रम को शांति और एकता का प्रतीक बताया जा रहा है। प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में हैं। अबूझमाड़ को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

खाकी और समाज ने मिलकर बचाई ज़िंदगियां

बस्तर। महारानी अस्पताल में रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर पहल की। अधिकारियों और समाजसेवियों ने स्वयं रक्तदान किया। 39 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया। उद्देश्य सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मदद देना है। युवाओं ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की। रक्तदान के साथ सड़क सुरक्षा का संदेश दिया गया।

हेलमेट और सीट बेल्ट पर जोर दिया गया। रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। एसपी ने नियमित रक्तदान की अपील की। शिविर ने मानवता की मिसाल पेश की। बस्तर में सेवा और सुरक्षा का मजबूत संदेश गया।

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