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संकुल शैक्षिक समन्वयक के रूप में अलका चौहथा निभा रही हैं अहम जिम्मेदारी

रायपुर,

शिक्षा के क्षेत्र में महिलाएं अपनी प्रतिभा, परिश्रम और नेतृत्व क्षमता से निरंतर नई पहचान बना रही हैं। एम सी बी जिला के मनेंद्रगढ़ क्षेत्र में प्राथमिक शाला वार्ड क्रमांक 09 की प्रधान पाठिका श्रीमती अलका चौहथा भी ऐसी ही प्रेरणादायी महिला हैं, जो अपने समर्पण और कार्यकुशलता के बल पर शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

जिले की एकमात्र महिला संकुल शैक्षिक समन्वयक

        20 मई 2025 से नियुक्त अलका चौहथा वर्तमान में जनजातीय कल्याण विभाग (TWD) के अंतर्गत संकुल शैक्षिक समन्वयक के रूप में कार्यरत हैं। जिले में कार्यरत 28 संकुल शैक्षिक समन्वयकों में वे एकमात्र महिला संकुल शैक्षिक समन्वयक हैं। यह उपलब्धि न केवल उनके लिए गौरव का विषय है, बल्कि जिले की अनेक महिला शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में निभा रहीं अहम भूमिका

        संकुल शैक्षिक समन्वयक शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है। इस पद का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर बनाना, शिक्षकों को आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करना तथा विद्यार्थियों के अधिगम स्तर में सुधार लाना होता है। अलका चौहथा अपने संकुल के अंतर्गत आने वाले विद्यालयों का नियमित भ्रमण कर शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का निरीक्षण करती हैं तथा शिक्षकों को नई शिक्षण पद्धतियों, प्रभावी पाठ योजना और गतिविधि आधारित शिक्षण के लिए प्रेरित करती हैं।

शिक्षकों के प्रशिक्षण और मार्गदर्शन पर विशेष ध्यान

        वे समय-समय पर शिक्षकों की बैठक, प्रशिक्षण एवं शैक्षणिक कार्यशालाओं का आयोजन कर शिक्षकों की क्षमता में और शिक्षा गुणवत्ता में वृद्धि करने का प्रयास करती हैं। साथ ही विद्यार्थियों के अधिगम स्तर और शैक्षणिक परिणामों में सुधार के लिए योजनाएं तैयार करती हैं तथा शासन द्वारा संचालित विभिन्न शैक्षणिक योजनाओं और कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करती हैं।

समर्पण और निष्ठा से दे रहीं उल्लेखनीय योगदान

       विद्यालयों की प्रगति, उपलब्धियों और समस्याओं से संबंधित रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को प्रेषित करना भी उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का हिस्सा है। अलका चौहथा अपने कर्तव्यों का निष्ठा, समर्पण और सकारात्मक सोच के साथ निर्वहन करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं।

        उनका कार्य न केवल विद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण बनाने में सहायक हो रहा है, बल्कि जिले की अन्य महिला शिक्षकों को भी आगे बढ़ने और नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए प्रेरित कर रहा है। अलका चौहथा की यह प्रेरक यात्रा यह संदेश देती है कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के साथ महिलाएं शिक्षा सहित हर क्षेत्र में उत्कृष्ट नेतृत्व प्रदान कर सकती हैं।

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