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नशे के खिलाफ निर्णायक जंग: साय सरकार ने बनाई SOG और एंटी नारकोटिक्स सेल

रायपुर। छत्तीसगढ़, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, प्राकृतिक संसाधनों और शांत सामाजिक जीवन के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में देश के अन्य हिस्सों की तरह यहाँ भी अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति ने चिंतनीय स्थिति पैदा की है। नशीले पदार्थ केवल कानून-व्यवस्था की दृष्टि से ही समस्या नहीं हैं बल्कि यह समाज, परिवार और युवाओं के भविष्य के लिए भी गंभीर चुनौती है।

इसका सामना करने के लिए छत्तीसगढ़ की सरकार ने कुछ निर्णायक कदम उठाए हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए विशेष अभियान समूह (एसओजी) और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के गठन का फ़ैसला किया है। राज्य सरकार पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने से साथ ही साथ प्रदेश को नशामुक्त बनाने की व्यापक रणनीति तैयार की है।

साय सरकार का स्पष्ट संदेश है कि छत्तीसगढ़ में नशे के व्यापार के लिए कोई जगह नहीं है और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर अब क़ानून का शिकंजा कसा जाएगा।

नशे की समस्या बन रही समाज के लिए गंभीर चुनौती

दुनिया के कई देशों की तरह भारत भी आज नशे की समस्या से जूझ रहा है। तरह-तरह के मादक पदार्थों जैसे गांजा, चरस, हेरोइन, ब्राउन शुगर, अफीम, डोडा और सिंथेटिक ड्रग्स समाज के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में बहुत से क्षेत्रों में नशीले पदार्थों की तस्करी का नेटवर्क सक्रिय हो रहा है। विधानसभा में उठाए गए प्रश्नों और विभिन्न सर्वेक्षणों के आधार पर कहा जा सकता है कि राज्य में नशे के सेवन करने वालों की संख्या चिंताजनक हो सकती है।

राष्ट्रीय स्तर पर किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार छत्तीसगढ़ में लगभग 1.5 से 2 लाख लोग अफीम और इंजेक्टेबल ड्रग्स का सेवन कर रहे हैं। 3.8 से 4 लाख लोग गांजा का उपयोग कर रहे हैं। 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के 40,000 से अधिक किशोर इनहेलेंट और कफ सिरप जैसी नशीली चीजों के आदी हो रहे हैं। यह आंकड़े उस सामाजिक चुनौती का संकेत हैं जिसका सामना समाज और सरकार दोनों को मिलकर करना होगा।

नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने के अलावा अपराध, हिंसा, मानसिक तनाव और सामाजिक अस्थिरता भी बढ़ाने वाला होता है। नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं होती बल्कि यह समाज की सामूहिक जिम्मेदारी भी है।

सरकार की सक्रियता और कड़े अभियान आंकड़ों में दिखाई दे रहा

छत्तीसगढ़ सरकार का दावा है कि राज्य में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ लगातार और प्रभावी कार्रवाई की जारी है। इसका नतीजा हाल के वर्षों में हुई गिरफ्तारियों और जब्तियों के आंकड़ों में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। पिछले 13 महीनों में 1,434 मामले दर्ज किए गए, 2,599 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, 20,089 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया और 3,00,408 नशीली गोलियां और कैप्सूल बरामद किए गए राज्य सरकार की यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय रूप से नशे के नेटवर्क को तोड़ने में सलगन हैं।

साल 2025 में मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान में और भी तेज़ी लाई गई। इस साल 1,288 मामले दर्ज हुए और 2,342 आरोपी गिरफ्तार किए गए। अभियान में जब्त किए गए पदार्थों में शामिल थे 16,999.7 किलोग्राम गांजा,141 ग्राम ब्राउन शुगर,1,259 ग्राम अफीम, 2.039 किलोग्राम हेरोइन, 27.68 ग्राम चरस, 23.56 ग्राम कोकीन, 70.46 ग्राम एमडीएमए, 1,524 किलोग्राम डोडा, और 2,41,138 नशीली दवाएं यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि राज्य सरकार नशे के खिलाफ व्यापक, सख़्त और संगठित कार्रवाई कर रही है।

2026 की शुरुआत में भी जारी अभियान

साल 2026 की शुरुआत में भी यह अभियान जारी है। 31 जनवरी 2026 तक नशे के ख़िलाफ़ 146 मामले दर्ज हुए जिसमें 257 आरोपी गिरफ्तार किए गए
और बरामदगी की सूची इस प्रकार से है 3,090 किलोग्राम गांजा, 8.85 ग्राम ब्राउन शुगर, 277.2 ग्राम अफीम, 123.8 ग्राम हेरोइन, 15.29 किलोग्राम डोडा और 59,270 नशीली दवाएं इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सरकार के द्वारा नशे के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई कितनी सख़्त है।

एसओजी और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स साबित हो रहा है एक रणनीतिक कदम

छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने अब मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराधों से निपटने के लिए नई संस्थागत व्यवस्था बनाने का फ़ैसला किया है।प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दो महत्वपूर्ण कदम उठाए गए जिसमें पहला है विशेष अभियान समूह (SOG) एसओजी का गठन पुलिस मुख्यालय के अंतर्गत किया गया इसका उद्देश्य है आतंकवादी खतरों से निपटना और संगठित अपराधों पर कार्रवाई करना अचानक उत्पन्न होने वाली सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए यह समूह आधुनिक तकनीक और विशेष प्रशिक्षण से लैस होगा।

दूसरा कदम है एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स, नशे के खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए 10 जिलों में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स बनाई जा रही है। इसके लिए 100 नए पदों के लिए मंजूरी दे दी गई है।इस फ़ोर्स से खुफिया जानकारी जुटाने में तेजी आएगी, तस्करी के नेटवर्क को जल्दी पकड़ा जा सकेगा और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ेगा। राज्य सरकार का यह कदम दर्शाता है कि सरकार समस्या की गंभीरता को समझते हुए दीर्घकालिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ रही है।

एनडीपीएस अधिनियम से किया जा रहा है आर्थिक नेटवर्क पर भी प्रहार

नशे का कारोबार केवल ड्रग्स की बिक्री तक सीमित नहीं होता। इसके पीछे कई बड़े आर्थिक नेटवर्क भी काम करते हैं जिसको ध्यान में रखते हुए सरकार ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत वित्तीय जांच को भी प्राथमिकता देने का काम किया है। इसके तहत 2025 में 16 आरोपियों की 13.29 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त या फ्रीज की गई इसके अलावा 145 आदतन अपराधियों के खिलाफ PIT-NDPS कानून के तहत कार्रवाई की गई। छत्तीसगढ़ के साय सरकार की यह रणनीति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जब तक अपराधियों के आर्थिक स्रोतों को खत्म नहीं किया जाएगा तब तक नशे के कारोबार को पूरी तरह खत्म करना मुश्किल है।

ड्रग उपयोग के उपकरणों पर भी हो रही कार्रवाई

छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने यह भी समझा है कि नशे के नेटवर्क को खत्म करने के लिए ड्रग्स के अलावा उससे जुड़े उपकरणों पर भी नियंत्रण जरूरी है। यही वजह है कि रायपुर और दुर्ग में गोगो पाइप, स्मोकिंग कोन, रोलिंग पेपर जैसे उपकरणों की बिक्री के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है।इससे नशे की आपूर्ति और उपयोग दोनों पर नियंत्रण करने में मदद मिल रही है।

जन जागरूकता तय कर रहा नशामुक्त समाज की दिशा

नशे के खिलाफ जंग केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं जीती जा सकती। इसके लिए समाज में जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। इसी उद्देश्य से छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने कई जागरूकता अभियान शुरू किए हैं। स्कूलों और कॉलेजों में इससे सम्बंधित विभिन्न कार्यक्रम, गांवों में जनसभाएं, पोस्टर और बैनर अभियान और सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता फैलाने के अलावा राज्य में एक टोल-फ्री हेल्पलाइन “मानस” (1933) शुरू की गई है जिसके माध्यम से प्रदेश का आम नागरिक भी नशीले पदार्थों से संबंधित गतिविधियों की सूचना दे सकते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का नेतृत्व और नशा मुक्त होता छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में नशे के खिलाफ इस व्यापक अभियान के पीछे यशस्वी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का स्पष्ट दृष्टिकोण दिखाई देता है। मुख्यमंत्री का मानना है कि राज्य का विकास तभी संभव है जब समाज स्वस्थ और सुरक्षित हो। उनके नेतृत्व में सरकार की कानून-व्यवस्था और भी मजबूत हुई है। आधुनिक पुलिस व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाना और नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई उनकी इसी व्यापक सोच का हिस्सा है।मुख्यमंत्री साय बार-बार यही कहते हैं कि “युवा शक्ति ही राज्य की सबसे बड़ी पूंजी है इसलिए युवाओं को नशे से दूर रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।”

आरम्भ हुआ तकनीक और सुशासन का नया दौर

नशे के खिलाफ कार्रवाई के अलावा राज्य सरकार ने कई अन्य महत्वपूर्ण कदम भी उठाए हैं। कैबिनेट ने “क्लाउड फर्स्ट” डिजिटल नीति को भी मंजूरी दी है जिसके तहत प्रदेश के सभी सरकारी विभागों को 2030 तक सुरक्षित भारतीय क्लाउड सर्वरों पर स्थानांतरित किया जाएगा।इससे सरकारी सेवाएं 24×7 उपलब्ध होंगी डेटा पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रशासन अधिक प्रभावी होगा। इसके साथ ही दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल टावर लगाने की योजना को भी मंजूरी दी गई है ताकि संचार व्यवस्था और भी मजबूत हो सके।

नशा मुक्ति में समाज की भूमिका भी होती है महत्वपूर्ण

सरकार का कोई भी प्रयास तभी सफल होता है जब समाज भी इसमें सक्रिय भूमिका निभाए।परिवार, स्कूल और सामाजिक संस्थाएं युवाओं को प्रभावी ढंग से नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक कर सकती हैं। यह भी जरूरी है कि माता-पिता बच्चों पर ध्यान दें, स्कूलों में परामर्श व्यवस्था हो, और समाज नशे के खिलाफ सकारात्मक वातावरण बनाए क्योंकि जब सरकार और समाज मिलकर काम करेंगे तभी नशामुक्त छत्तीसगढ़ का सपना साकार हो सकेगा। नशा एक ऐसी समस्या है जो भीतर ही भीतर समाज को अंदर से कमजोर कर देती है। इसलिए इसके खिलाफ समय रहते कठोर कदम उठाने का निर्णय लिया गया है।

छत्तीसगढ़ में एसओजी और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन इसी दिशा में एक शानदार पहल है। प्रदेश में गिरफ्तारी और जब्ती के बढ़ते आंकड़े यह दर्शाते हैं कि सरकार नशे के खिलाफ गंभीरता से कार्रवाई कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने यह संकल्प लिया है कि छत्तीसगढ़ में नशे के कारोबार को किसी भी कीमत पर पनपने नहीं दिया जाएगा।यदि इसी तरह सख्ती, जागरूकता और तकनीकी नवाचार का समन्वय होता रहा तो वह दिन भी दूर नहीं जब छत्तीसगढ़ एक सुरक्षित, स्वस्थ और नशामुक्त राज्य के रूप में पूरे देश के सामने उदाहरण बनकर उभरेगा।

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