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छत्तीसगढ़ के लिए बड़ी सौगात: बस्तर में रेल क्रांति के लिए केंद्र की हरी झंडी, ₹3513 करोड़ की रेल परियोजना को मिली मंजूरी

140 किलोमीटर लंबी रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन से सीधे रायपुर और देश के प्रमुख महानगरों से जुड़ेगा बस्तर।

रायपुर/बस्तर: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के विकास को नई रफ्तार देते हुए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। केंद्रीय रेल मंत्रालय ने बहुप्रतीक्षित रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन परियोजना को औपचारिक मंजूरी दे दी है। 140 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन के निर्माण पर 3,513.11 करोड़ रुपये की लागत आएगी, जिसका पूरा खर्च केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

दशकों का इंतजार खत्म, रायपुर से सीधे जुड़ेंगे आदिवासी जिले इस परियोजना को बस्तर की ‘जीवनरेखा’ माना जा रहा है। यह रेल मार्ग नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर जैसे उन दुर्गम जिलों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ेगा, जो आजादी के बाद से अब तक रेल सुविधाओं से वंचित थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस फैसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना केवल पटरी बिछाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बस्तर में आशा, रोजगार और सुरक्षा की नींव रखेगी।

खनिज संपदा और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा वर्तमान में बस्तर क्षेत्र में केवल एक ही रेल लाइन है, जो दंतेवाड़ा को विशाखापट्टनम से जोड़ती है और मुख्य रूप से एनएमडीसी (NMDC) की खदानों से लौह अयस्क ढोने के काम आती है। नई रावघाट-जगदलपुर लाइन के पूरा होने पर बस्तर सीधे राजधानी रायपुर से जुड़ जाएगा। इसके अलावा, यह क्षेत्र मुंबई-हावड़ा रेल कॉरिडोर से भी एकीकृत हो जाएगा, जिससे उत्तर और पश्चिमी भारत के बड़े शहरों तक पहुंच आसान हो जाएगी।

नक्सलवाद पर विकास का प्रहार यह परियोजना रणनीतिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक वामपंथी उग्रवाद (LWE) को जड़ से समाप्त करना है। अधिकारियों का मानना है कि दूरदराज के आदिवासी गांवों तक विकास और कनेक्टिविटी पहुंचने से डर और अलगाव की भावना खत्म होगी और स्थानीय समुदायों में विश्वास बढ़ेगा।

70 साल पुरानी मांग और वर्तमान स्थिति बस्तर में रेल विस्तार की मांग करीब 70 साल पुरानी है, जो पहली बार 1955 में एक आदिवासी सम्मेलन के दौरान उठी थी। अब, दशकों के इंतजार के बाद इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है और निर्माण कार्य शुरू करने के लिए निविदाएं (tenders) जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

प्रभाव और विश्लेषण: इस रेल परियोजना का सबसे व्यापक प्रभाव बस्तर के सामाजिक और आर्थिक ढांचे पर पड़ेगा। पर्यटन, स्थानीय वनोपज और हस्तशिल्प के लिए नए बाजार खुलेंगे। साथ ही, औद्योगिक रसद (logistics) में सुधार से निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, जिससे एमएसएमई (MSME) क्लस्टर विकसित हो सकेंगे। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुलभ होने से स्थानीय जनजातीय समुदायों के जीवन स्तर में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है。

रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन का निर्माण शुरू होने के साथ ही बस्तर के विकास का एक नया अध्याय शुरू होगा। वर्तमान में जमीन तैयार है और जल्द ही पटरी बिछाने का काम धरातल पर दिखाई देगा, जो भविष्य में इस क्षेत्र को देश की मुख्यधारा से मजबूती से जोड़ देगा।

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