ठग ने खुद को बिजली विभाग का कर्मचारी बताकर भेजा था लिंक, मात्र 13 रुपये के भुगतान के चक्कर में लगा लाखों का चूना।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में साइबर अपराधियों ने एक कारोबारी को अपना निशाना बनाते हुए उनके बैंक खातों से 7 लाख रुपये से अधिक की राशि पार कर दी है। यह सनसनीखेज मामला रायपुर के देवेंद्र नगर थाना क्षेत्र का है, जहाँ नए बिजली मीटर लगाने के नाम पर ठगों ने पीड़ित का मोबाइल हैक कर इस बड़ी वारदात को अंजाम दिया।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सेक्टर-2 निवासी आशीष भाई देसाई, जो लेमिनेट का व्यवसाय करते हैं, ने 1 अप्रैल 2026 को नया बिजली मीटर लगवाने के लिए दलदल सिवनी-मोवा स्थित बिजली कार्यालय में आवेदन दिया था। इसी बीच, 4 अप्रैल की सुबह करीब 8:20 बजे उन्हें एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को बिजली विभाग का कर्मचारी बताया और दावा किया कि मीटर लगाने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए उन्हें 13 रुपये का ऑनलाइन भुगतान करना होगा।
ठग ने पीड़ित के व्हाट्सएप पर एक लिंक भेजा, जिस पर बिजली विभाग का आधिकारिक लोगो भी लगा हुआ था। जैसे ही पीड़ित ने भरोसे में आकर उस लिंक को ओपन किया, उनका मोबाइल फोन हैक हो गया। इसके बाद साइबर ठग ने उनके बैंक खातों में सेंध लगा दी। ठगों ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र के खाते से 6 किश्तों में 6,03,472 रुपये और एचडीएफसी बैंक के खाते से 99,000 रुपये निकाल लिए। इस तरह कुल 8 ट्रांजैक्शन के जरिए 7,02,472 रुपये की ऑनलाइन ठगी की गई। जब पीड़ित के पास पैसे कटने के मैसेज आए, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
सावधानी ही बचाव: सरकारी विभाग नहीं भेजते ऐसे लिंक इस घटना का व्यापक असर आम जनता की सुरक्षा और उनकी जागरूकता पर पड़ता है। बिजली विभाग जैसी अनिवार्य सेवाओं के नाम पर होने वाली यह ठगी दर्शाती है कि अपराधी अब लोगों की बुनियादी जरूरतों का फायदा उठा रहे हैं। मामूली रकम (जैसे ₹13) का झांसा देकर पूरे बैंक खाते को खाली करना साइबर अपराधियों का नया और खतरनाक पैंतरा है। यह घटना एक चेतावनी है कि डिजिटल दौर में आपकी एक छोटी सी लापरवाही जीवन भर की कमाई को खतरे में डाल सकती है।
देवेंद्र नगर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश और तकनीकी जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने आम नागरिकों से पुरजोर अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही फोन पर मांगी गई अपनी बैंकिंग जानकारी साझा करें। स्पष्ट किया गया है कि कोई भी सरकारी विभाग कभी भी इस तरह लिंक भेजकर भुगतान की मांग नहीं करता है। वर्तमान में, पुलिस ठगों के ट्रांजैक्शन ट्रेल और मोबाइल नंबरों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है।