जेल के मुलाकाती कक्ष में अपराधियों के साथ बनाया गया वीडियो, ‘सीधा ठोक दू’ गाने पर रील बनाकर इंस्टाग्राम पर किया पोस्ट।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्थित सेंट्रल जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले के चर्चित मस्तूरी गोलीकांड के आरोपी जेल के भीतर से रीलबाजी करते नजर आ रहे हैं। जेल के मुलाकाती कक्ष (मुलाकाती हॉल) में अपराधियों से मिलने आए उनके साथियों ने मोबाइल से वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा घटनाक्रम? मस्तूरी क्षेत्र में पुरानी रंजिश और वर्चस्व की लड़ाई को लेकर कांग्रेस नेता व जनपद उपाध्यक्ष नीतेश सिंह और उनके परिजनों पर फायरिंग की गई थी। इस मामले में पुलिस ने अब तक युवा कांग्रेस नेता विश्वजीत अनंत और कांग्रेस नेता अकबर खान समेत कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वर्तमान में 10 आरोपी जेल में बंद हैं, जबकि एक नाबालिग को बाल संरक्षण गृह में रखा गया है।
हाल ही में इन आरोपियों से मिलने पहुंचे उनके रिश्तेदारों और दोस्तों ने जेल के भीतर मुलाकाती कक्ष में मोबाइल ले जाकर वीडियो रिकॉर्ड किया। इस वीडियो को ‘_devebh_don99X’ नामक इंस्टाग्राम आईडी से ‘सीधा ठोक दू शहर में जो दादा बनता’ गाने के साथ रील बनाकर साझा किया गया। हालांकि, वीडियो वायरल होने के बाद इसे डिलीट कर दिया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल और आधिकारिक कार्रवाई सेंट्रल जेल के नियमों के मुताबिक, मुलाकात के दौरान मोबाइल फोन या किसी भी प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। मुलाकातियों की सघन जांच की जाती है, इसके बावजूद मोबाइल का अंदर पहुंचना और वीडियो बनाया जाना जेल की सुरक्षा में एक बड़ी चूक माना जा रहा है।
जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि चोरी-छिपे वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने वालों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाएगी। फिलहाल तकनीकी पहलुओं और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच की जा रही है कि मोबाइल अंदर कैसे पहुंचा।
फरार आरोपियों की तलाश जारी एक ओर जहां जेल में बंद आरोपी रीलबाजी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गोलीकांड के दो मुख्य आरोपी नागेंद्र राय और तारकेश्वर पाटले वारदात के बाद से अब भी फरार हैं। पुलिस का दावा है कि वे जल्द ही पकड़ में आएंगे, हालांकि चर्चा है कि दोनों फरार आरोपी अपने परिजनों और दोस्तों के लगातार संपर्क में हैं।
प्रभाव और विश्लेषण जेल जैसी संवेदनशील जगह से अपराधियों का इस तरह महिमामंडन (Glorification) करना समाज में गलत संदेश देता है। यह न केवल कानून व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाता है, बल्कि पीड़ित पक्ष के मन में भी असुरक्षा की भावना पैदा करता है। जेल प्रशासन को अपनी जांच प्रक्रिया को और अधिक सख्त करने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
वर्तमान में जेल प्रशासन मामले की आंतरिक जांच कर रहा है। रील बनाने वाले युवाओं की पहचान कर उन पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी है। इस घटना ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ की जेलों में सुरक्षा प्रोटोकॉल और कर्मचारियों की सतर्कता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।