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बिलासपुर में बर्ड फ्लू का खतरा: केंद्रीय टीम ने किया प्रभावित इलाकों का दौरा, जल्द हट सकता है चिकन और अंडे की बिक्री पर प्रतिबंध

एम्स विशेषज्ञों की टीम ने वेटनरी कॉलेज और गांवों में जांची जमीनी स्थिति; कलेक्टर को सौंपी जाने वाली रिपोर्ट पर टिकी है कारोबारियों की नजर

बिलासपुर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में बर्ड फ्लू के संक्रमण को रोकने के लिए प्रशासन की सख्ती के बीच केंद्र सरकार की एक विशेष टीम पिछले तीन दिनों से लगातार मोर्चा संभाले हुए है। बुधवार को एम्स के विशेषज्ञों और केंद्रीय टीम ने शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक का सघन दौरा किया ताकि स्थिति का सटीक आकलन किया जा सके।

पूरा घटनाक्रम और टीम की कार्रवाई केंद्रीय विशेषज्ञों की टीम बुधवार को कोनी स्थित वेटनरी कॉलेज पहुंची। यह वही स्थान है जहां संक्रमण की पुष्टि के बाद 1895 मुर्गियों को दफनाया गया था। विशेषज्ञों ने यहां सैनिटाइजेशन और डिसइंफेक्शन की व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया और यह सुनिश्चित किया कि सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया जा रहा है या नहीं। आंकड़ों के अनुसार, अब तक जिले में संक्रमण रोकने के लिए 47 हजार से ज्यादा पक्षी और अंडे नष्ट किए जा चुके हैं।

वेटनरी कॉलेज के बाद टीम कोनी के देवनगर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पहुंची। यहां विशेषज्ञों ने सीधे ग्रामीणों से संवाद कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और बर्ड फ्लू के किसी भी संभावित लक्षण के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी। टीम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मानव संक्रमण को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार सर्विलांस बनाए रखे और जरूरत पड़ने पर तत्काल आरटी-पीसीआर (RT-PCR) जांच कराई जाए।

प्रशासनिक सख्ती और निगरानी वर्तमान में जिला प्रशासन ने शासकीय कुक्कुट प्रक्षेत्र के 10 किलोमीटर के दायरे को निगरानी क्षेत्र (Surveillance Zone) घोषित कर रखा है। इस दायरे में आने वाले सभी पोल्ट्री फार्मों की जांच की जा रही है और मुर्गियों की सेहत पर विशेषज्ञ नजर रख रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि संक्रमण नियंत्रण के उपाय असर दिखा रहे हैं और स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है।

आम जनता और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर आम जनता और पोल्ट्री व्यवसाय पर पड़ा है। बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद से ही जिले में चिकन और अंडे की बिक्री पर रोक लगी हुई है, जिससे कारोबारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों में भी स्वास्थ्य को लेकर चिंता बनी हुई है। केंद्रीय टीम के इस दौरे और उनकी रिपोर्ट से यह साफ होगा कि क्या बाजार में फिर से चिकन और अंडे की बिक्री शुरू की जा सकती है।

केंद्रीय टीम अपनी विस्तृत रिपोर्ट बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल और भारत सरकार को सौंपेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगामी रणनीति तैयार की जाएगी। यदि विशेषज्ञों की रिपोर्ट में स्थिति संतोषजनक पाई जाती है, तो प्रशासन जल्द ही राहत भरा फैसला लेते हुए बाजार में चिकन और अंडे की बिक्री पर लगे प्रतिबंध को हटाने का निर्णय ले सकता है।

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