मिशन कर्मयोगी के तहत i-GOT प्लेटफॉर्म पर ट्रेनिंग अनिवार्य, कौशल विकास के लिए राज्य शासन ने जारी किए निर्देश।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों के लिए राज्य शासन ने एक महत्वपूर्ण और सख्त निर्देश जारी किया है। ‘मिशन कर्मयोगी’ कार्यक्रम के तहत अब प्रदेश के शासकीय सेवकों को अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए तीन ऑनलाइन कोर्स करना अनिवार्य होगा। शासन ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि में ये कोर्स पूरे नहीं किए गए, तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी को अप्रैल माह का वेतन नहीं दिया जाएगा।
i-GOT प्लेटफॉर्म पर प्रशिक्षण अनिवार्य राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत विकसित आई-गॉट (एकीकृत सरकारी ऑनलाइन प्रशिक्षण) प्लेटफॉर्म को प्रदेश में सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। यह एक एआई (AI) आधारित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जिसका मुख्य उद्देश्य सरकारी तंत्र में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यक्षमता, कौशल विकास और निरंतर प्रशिक्षण सुनिश्चित करना है। शासन के निर्देशानुसार, वर्ग तीन और उससे ऊपर के सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को अपने पद और कार्यक्षेत्र के अनुरूप कोर्स का चयन करना होगा।
इन विषयों पर फोकस और एआई कोर्स की अनिवार्यता इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत विभागीय ज्ञान, कार्यप्रणाली कौशल, नेतृत्व, नैतिकता, नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण, डिजिटल कार्य प्रणाली और डेटा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल किए गए हैं। शासन ने विशेष रूप से यह प्रावधान किया है कि सभी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से संबंधित कोर्स करना अनिवार्य होगा। प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी को अपनी प्रोफाइल के आधार पर कम से कम तीन कोर्स पूरे करने होंगे।
इसका असर और भविष्य की योजना सरकार के इस फैसले का सीधा असर प्रदेश के हजारों कर्मचारियों पर पड़ेगा। वेतन रोकने के प्रावधान के कारण अब कर्मचारियों को समय रहते डिजिटल प्रशिक्षण पूरा करना होगा। शासन की योजना इसे केवल वेतन तक सीमित रखने की नहीं है; जानकारी के अनुसार, वर्ष 2026-27 से वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (APAR) में भी इन तीन कोर्स की अनिवार्यता को जोड़ा जाएगा। इससे कर्मचारियों की पदोन्नति और भविष्य के मूल्यांकन में इन प्रशिक्षणों की बड़ी भूमिका होगी।
वर्तमान में शासन के इस निर्देश के बाद सभी विभागों में हड़कंप की स्थिति है और अधिकारी-कर्मचारी जल्द से जल्द पोर्टल पर पंजीकरण कर कोर्स पूरा करने की तैयारी में जुट गए हैं। सरकार का यह कदम राज्य प्रशासन को अधिक आधुनिक, डिजिटल और नागरिक-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।