मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए की बड़ी घोषणा; 36 लाख लोगों की होगी हेल्थ स्क्रीनिंग।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं को अगले स्तर पर ले जाने के लिए एक बड़ी योजना का खुलासा किया है। शुक्रवार को नवा रायपुर के आयुष विश्वविद्यालय में आयोजित ‘ऑल इंडिया हेल्थ साइंसेज वाइस चांसलर मीट’ के दौरान मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि नवा रायपुर में 5000 बेड का एक विशाल सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाया जाएगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य पूरे क्षेत्र को एक ‘मेडिसिटी हब’ के रूप में विकसित करना है, जिससे छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य सेवाओं के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरे।
मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि स्वस्थ नागरिक ही ‘विकसित छत्तीसगढ़’ की आधारशिला हैं। उन्होंने राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) को सुदृढ़ करना उनकी प्राथमिकता है। सीएम के अनुसार, पिछले दो वर्षों में रायपुर में एक दर्जन से अधिक निजी अस्पतालों की शुरुआत हुई है, जिससे चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।
राज्य में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार पर जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में 5 नए मेडिकल कॉलेज, 14 नर्सिंग कॉलेज और एक होम्योपैथी कॉलेज का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। सम्मेलन में मौजूद स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने एक अन्य महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि आगामी 13 अप्रैल से ‘मुख्यमंत्री बस्तर स्वास्थ्य योजना’ के तहत 36 लाख लोगों की हेल्थ स्क्रीनिंग की जाएगी और उनके आयुष्मान कार्ड बनाए जाएंगे। जायसवाल ने यह भी उल्लेख किया कि राज्य में अब चिकित्सा शिक्षा की पढ़ाई हिंदी माध्यम से भी कराई जा रही है और भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
प्रभाव और विश्लेषण नवा रायपुर में 5000 बिस्तरों वाले अस्पताल और मेडिसिटी हब के निर्माण से न केवल स्थानीय नागरिकों को विश्वस्तरीय इलाज मिलेगा, बल्कि इससे पड़ोसी राज्यों के मरीजों को भी राहत मिलेगी। इतने बड़े स्तर पर चिकित्सा अधोसंरचना का विकास होने से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्वास्थ्य पर्यटन (Medical Tourism) को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त, हिंदी माध्यम में डॉक्टरी की पढ़ाई शुरू होने से ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए चिकित्सा क्षेत्र की राह आसान होगी।
इस सम्मेलन से प्राप्त महत्वपूर्ण सुझावों को केंद्रीय आयुष मंत्रालय को भेजा जाएगा ताकि उन्हें राष्ट्रीय नीतियों का हिस्सा बनाया जा सके। वर्तमान में सरकार का पूरा ध्यान इन परियोजनाओं को समय सीमा के भीतर पूरा करने पर है, जिससे आने वाले समय में छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ‘रोल मॉडल’ बनकर उभर सके।