• Home
  • छत्तीसगढ़
  • सिम्स बिलासपुर में विश्व एड्स दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम एवं नुक्कड़ नाटक का आयोजन
Image

सिम्स बिलासपुर में विश्व एड्स दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम एवं नुक्कड़ नाटक का आयोजन

रायपुर

विश्व एड्स दिवस

विश्व एड्स दिवस के अवसर पर सिम्स चिकित्सालय  बिलासपुर में एचआईवी/एड्स से बचाव, जागरूकता और भ्रांतियों को दूर करने हेतु विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में नर्सिंग छात्राओं तथा विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों ने मरीजों और उनके परिजनों को एड्स से संबंधित सही जानकारी उपलब्ध कराई।

बीएससी नर्सिंग की छात्राओं और संदीपनि अकादमी के विद्यार्थियों द्वारा ART सेंटर, मरीज पंजीयन विभाग हॉल, आपातकालीन विभाग के सामने और गायनी ओपीडी के निकट नुक्कड़ नाटक एवं पोस्टर प्रदर्शन किए गए।

ART सेंटर की टीम —
डॉ प्रभात कुमार श्रीवास्तव (मेडिकल ऑफिसर), योगेश जड़िया (काउंसलर), सारिका पटेल (काउंसलर), कल्पना लकड़ा (काउंसलर), अंशुलता (फार्मासिस्ट), ललिता सिंह (एलटी), नंदकिशोर पटेल (एलटी), राधाकृष्णन तिवारी — ने विभिन्न विभागों में जाकर लोगों को विस्तृत जानकारी दी।

नर्सिंग विभाग से असिस्टेंट नर्सिंग सुपरीटेंडेंट नमिता वाणी, राजकुमारी, पुष्पलता शर्मा और संजू चौधरी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहीं और छात्राओं को मार्गदर्शन प्रदान किया।

एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष 

 डॉ. मधुमिता मूर्ति ने कार्यक्रम के दौरान उपस्थित मरीजों एवं परिजनों को एड्स से संबंधित महत्वपूर्ण चिकित्सा पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि—
“एचआईवी संक्रमण को लेकर लोगों में अब भी कई तरह की गलत धारणाएँ हैं। चिकित्सा क्षेत्रों में संक्रमण की रोकथाम, सुरक्षित रक्त संक्रमण, सुइयों का सुरक्षित उपयोग और सार्वभौमिक सावधानियों का पालन अत्यंत आवश्यक है। यदि समाज सही जानकारी से सशक्त होगा, तो संक्रमण के फैलाव को काफी हद तक रोका जा सकता है। सिम्स में हम सभी विभागों के साथ मिलकर सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।”

सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा—
“विश्व एड्स दिवस समाज को जागरूक बनाने का अवसर है। छात्राओं की प्रस्तुति और विभागों द्वारा दी गई जानकारी लोगों में सही संदेश पहुँचाने में अत्यंत प्रभावी रही। सिम्स भविष्य में भी ऐसे जनहितकारी कार्यक्रमों को आगे बढ़ाता रहेगा।”

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा—
“एचआईवी/एड्स का उपचार उपलब्ध है और नियमित जांच तथा परामर्श से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। जागरूकता ही इसका सबसे बड़ा बचाव है। आज छात्रों और टीम द्वारा किया गया प्रयास प्रशंसनीय है और इससे आमजन में सकारात्मक संदेश पहुँचता हैं |

Releated Posts

सात जन्मों का साथ निभाने का वादा, पर मिली बेवफाई! महिला का शव फांसी के फंदे से लटका मिला

बालोद. छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में एक शादीशुदा महिला की घर के कमरे में फांसी के फंदे पर…

ByByNandni Manik Feb 25, 2026

विधानसभा बजट सत्र का आज तीसरा दिन, नशीले पदार्थ और स्वास्थ्य मिशन पर हंगामे के आसार; राज्यपाल के अभिभाषण पर होगी विस्तृत चर्चा

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र का आज तीसरा दिन हंगामेदार रहने वाला है। सदन में प्रश्नोत्तर, ध्यानाकर्षण…

ByByNandni Manik Feb 25, 2026

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top