• Home
  • छत्तीसगढ़
  • अंबेडकर अस्पताल में बना वर्ल्ड रिकॉर्ड: डॉक्टरों ने 11 साल के बच्चे के दिल से चिपका दुर्लभ कैंसर सफलतापूर्वक हटाया, जो आमतौर पर 40–60 वर्ष के लोगों में पाया जाता है
Image

अंबेडकर अस्पताल में बना वर्ल्ड रिकॉर्ड: डॉक्टरों ने 11 साल के बच्चे के दिल से चिपका दुर्लभ कैंसर सफलतापूर्वक हटाया, जो आमतौर पर 40–60 वर्ष के लोगों में पाया जाता है

रायपुर। पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध प्रदेश के सबसे बड़े शासकीय अस्पताल डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय ने एक और बड़ी चिकित्सा उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने 11 वर्ष के एक बच्चे के हृदय से चिपके अत्यंत दुर्लभ स्टेज-3 इनवेसिव थायमिक कैंसर (टाइप-बी थायमोमा) का सफल ऑपरेशन कर विश्व स्तर पर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

इसमें खास बात यह है कि अब तक मेडिकल जर्नल में इस प्रकार के कैंसर का सबसे कम उम्र का मरीज 12 वर्ष का दर्ज है, जबकि राज्य में 11 साल के बच्चे में यह बीमारी पाई गई और उसका सफल ऑपरेशन भी किया गया। अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू एवं उनकी टीम द्वारा यह जटिल सर्जरी की गई।

ऑपरेशन के छह माह बाद बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और इस वर्ष उसने पुनः स्कूल जाना शुरू कर कक्षा छठवीं की परीक्षा भी दी है। डॉक्टरों के अनुसार यह ट्यूमर सामान्यतः 40 से 60 वर्ष के लोगों में पाया जाता है और बच्चों में इसका मिलना अत्यंत दुर्लभ है। यह ट्यूमर हृदय, पेरिकार्डियम, फ्रेनिक नर्व महाधमनी (एओर्टा), मुख्य पल्मोनरी आर्टरी, लेफ्ट एट्रियम और फेफड़े से चिपका हुआ था। ऐसे मामलों में ट्यूमर को पूरी तरह निकाल पाना (आर-0 रिसेक्शन) लगभग असंभव माना जाता है, लेकिन अस्पताल में उपलब्ध हार्ट-लंग मशीन की मदद से यह संभव हो पाया।

ड्यूल एप्रोच तकनीक से हुआ ऑपरेशन

ट्यूमर का आकार बहुत बड़ा और कई अंगों से चिपका हुआ होने के कारण इसे निकालने के लिए ड्यूल एप्रोच तकनीक का उपयोग किया गया। इसके तहत मरीज के स्टर्नम (छाती की हड्डी) और पसली- दोनों स्थानों पर चीरा लगाया गया, जिसे मेडिकल भाषा में स्टर्नोटॉमी और थोरेक्टोमी कहा जाता है। मुख्य ट्यूमर के अलावा फेफड़े की प्लूरल कैविटी में फैले तीन अन्य सैटेलाइट ट्यूमर को भी सावधानीपूर्वक निकाला गया, ताकि भविष्य में कैंसर दोबारा फैलने की संभावना न रहे। निकाले गए ट्यूमर का आकार लगभग 12×8 सेंटीमीटर और वजन करीब 400 ग्राम था।

छह महीने से थी तकलीफ

चांपा निवासी कक्षा छठवीं में पढ़ने वाले इस बच्चे को करीब छह महीने से छाती में दर्द, भारीपन और सांस फूलने की शिकायत थी। जांच में पता चला कि उसके सीने में बड़ा ट्यूमर है, जो हृदय और मुख्य धमनियों से चिपका हुआ है। प्रदेश के कई अस्पतालों में ऑपरेशन से मना किए जाने के बाद मरीज को अम्बेडकर अस्पताल भेजा गया।

डॉ. कृष्णकांत साहू ने सीटी स्कैन देखने के बाद परिजनों को बताया कि ऑपरेशन अत्यंत जोखिम भरा है और सर्जरी के दौरान मरीज की जान को खतरा हो सकता है या ऑपरेशन बीच में रोकना पड़ सकता है। इसके बावजूद परिजनों ने सहमति दी और टीम ने सर्जरी का निर्णय लिया।

चार घंटे चली सर्जरी

ऑपरेशन के दौरान किसी भी आपात स्थिति के लिए हार्ट-लंग मशीन तैयार रखी गई थी। लगभग चार घंटे चली सर्जरी के दौरान हार्ट की झिल्ली, फ्रेनिक नर्व तथा फेफड़े के कुछ हिस्से को भी निकालना पड़ा। साथ ही हार्ट के लेफ्ट एट्रियम को भी रिपेयर किया गया क्योंकि ट्यूमर लेफ्ट एट्रियम से चिपका हुआ था। इस दौरान मरीज को चार यूनिट रक्त की आवश्यकता पड़ी। सर्जरी के बाद ट्यूमर के नमूने को बायोप्सी के लिए पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. राबिया परवीन सिद्दकी के पास भेजा गया, जहां जांच में इसे इनवेसिव थायमिक कार्सिनोमा (टाइप-बी थायमोमा, स्टेज-3) पाया गया। इसके बाद कैंसर विभाग द्वारा मरीज को 25 साइकिल रेडिएशन थेरेपी दी गई।

अब पूरी तरह स्वस्थ

सर्जरी और उपचार के लगभग छह माह बाद बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और दो महीने पहले से दोबारा स्कूल जाने लगा है। इस वर्ष उसने कक्षा छठवीं की परीक्षा भी दी है। इस दुर्लभ केस को राष्ट्रीय कैंसर सर्जरी सम्मेलन में भी प्रस्तुत किया गया, जहां इसे बेस्ट पेपर अवार्ड के रूप में सराहना मिली। विभाग अब इसे अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशित करने की भी तैयारी है।

प्रदेश का प्रमुख सेंटर

अंबेडकर अस्पताल का हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों में छाती, फेफड़े एवं मीडियास्टाइनल कैंसर की सर्जरी का प्रमुख केंद्र है। प्रदेश में इस प्रकार की लगभग 95 प्रतिशत से अधिक सर्जरी इसी विभाग में की जाती हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस सफलता के लिए मेडिकल कॉलेज और संबद्ध अस्पताल की पूरी टीम को बधाई दी है। पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी ने कहा कि यह सर्जरी एक बड़ी उपलब्धि है। चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध अंबेडकर अस्पताल में जटिल से जटिल सर्जरी भी सफलतापूर्वक की जा रही है और प्रदेश के मरीजों को अब ऐसी सर्जरी के लिए बड़े शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है।

अंबेडकर अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने कहा कि हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग की टीम ने अत्यंत कठिन और दुर्लभ ऑपरेशन को सफल कर अस्पताल की क्षमता को एक बार फिर साबित किया है।

Releated Posts

छत्तीसगढ़ी गाने पर पत्नी संग पुलिसकर्मी की रील वायरल—यूजर्स ने SSP से कार्रवाई मांगी, जवाब में बोला ‘तोर बबा ए करहि’

बिलासपुर. वर्दी पहनकर रील बनाने का एक मामला सामने आने के बाद हाल ही में एक आरक्षक लाइन…

ByByNandni Manik Apr 11, 2026

उद्योग और श्रम विभाग के आपसी समन्वय से संवर रहा है – छत्तीसगढ़

रायपुर , मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने जिस स्पष्ट नीति के साथ श्रमिकों और…

ByByNandni Manik Apr 11, 2026

स्वाभिमान की नई पहचान : छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण का स्वर्णिम दौर

रायपुर, छत्तीसगढ़ में वर्ष 2026 को “महतारी गौरव वर्ष” के रूप में मनाते हुए महिलाओं के सम्मान, स्वाभिमान…

ByByNandni Manik Apr 11, 2026

लग्जरी कार में घूमकर चेन स्नैचिंग—भीड़भाड़ वाले इलाकों में वारदात, 7 महिलाओं का गैंग और ड्राइवर गिरफ्तार

रायपुर. राजधानी रायपुर में लग्जरी वाहन से घूम-घूमकर चेन स्नैचिंग करने वाले शातिर महिलाओं के एक गैंग को पुलिस…

ByByNandni Manik Apr 11, 2026

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top