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कुमार राइटिंग्स ने डायरेक्टर सुकुमार गरु के जन्मदिन को खास बनाते हुए सोशल मीडिया पर स्पेशल पोस्ट शेयर किया

आज सुकुमार गरु के जन्मदिन पर, सुकुमार राइटिंग्स ने एक दिल से जुड़ा संदेश साझा किया, जिसमें उस फिल्ममेकर को सम्मान दिया गया जिसकी पहचान नएपन, मेहनत और बेखौफ कहानी कहने से बनी है. भले ही पुष्पा फ्रेंचाइज़ी ने उन्हें देशभर में मशहूर कर दिया हो, लेकिन तेलुगु सिनेमा के दर्शकों के लिए सुकुमार हमेशा सिर्फ बॉक्स-ऑफिस की सफलता तक सीमित नहीं रहे हैं.

अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्ट साझा करते हुए सुकुमार राइटिंग्स ने लिखा कि पुष्पा ने भारतीय सिनेमा में अब तक की सबसे बड़ी ओपनिंग दी, और दुनियाभर में रिकॉर्ड ₹294 करोड़ की कमाई की, जिससे एक नया मानक तय हो गया. इसके बाद यह सबसे तेजी से ₹500 करोड़ और ₹1,000 करोड़ का आंकड़ा पार करने वाली भारतीय फिल्म बनी और अलग-अलग बाजारों में कई रिकॉर्ड तोड़ दिए. हिंदी बेल्ट में पुष्पा ने पहले दिन ₹72 करोड़ की जबरदस्त कमाई की, जो ओपनिंग डे का नया रिकॉर्ड था, और आगे चलकर हिंदी में इसकी कुल कमाई ₹830 करोड़ तक पहुंच गई. आंकड़ों से आगे बढ़कर, पुष्पा एक कल्चरल फिनॉमिनोन बन गई और भारतीय सिनेमा के इतिहास में अपनी खास जगह बना ली.

मजबूत कहानी और नए टैलेंट पर आधारित प्रोजेक्ट्स को समर्थन देते हुए, इस बैनर ने कुमारी 21F, उप्पेना, विरुपाक्ष और 18 पेजेज़ जैसी फिल्में दी हैं, जो सुकुमार के सार्थक और आइडिया-आधारित सिनेमा में विश्वास को दिखाती हैं.

पुष्पा 2: द रूल की रिलीज़ ने सुकुमार को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया. यह फिल्म भारत और विदेशों में रिकॉर्ड तोड़ते हुए एक बड़ा सांस्कृतिक पल बन गई. आंकड़ों से बढ़कर, इस फिल्म ने एक बार फिर साबित किया कि सुकुमार ऐसे फिल्ममेकर हैं जो मजबूत हुनर और पक्के विश्वास के साथ मास अपील को बखूबी जोड़ते हैं.

पुष्पा के तूफान से पहले: भारत के बड़े फिल्ममेकर सुकुमार गरु की जबरदस्त फिल्मों की लिस्ट पर यहां डालें नजर:

1. रंगस्थलम (2018)

रंगस्थलम की खास बात यह है कि यह गांव की परेशानियों को दिखाते हुए भी एक आम आदमी की निजी लड़ाई पर ध्यान बनाए रखती है. बाहर से कहानी भले ही कड़ी लगे, लेकिन अंदर से यह बहुत सादगी और समझ के साथ कही गई है. यह फिल्म अपनी बात ज़ोर से नहीं कहती, बल्कि तनाव भरे पलों के बीच की चुप्पी से असर छोड़ती है. राम चरण के बदले हुए हाव-भाव और अंदाज़ से उनका किरदार बिल्कुल असली लगता है. सुकुमार ने ऐसे सींस बनाए हैं जो उसी जमीन जैसे लगते हैं, कहीं ऊबड़-खाबड़, कहीं खुले और अनजान से. फिल्म इसलिए भी याद रहती है क्योंकि इसमें राजनीति परिवार की रोज़मर्रा की जिंदगी में स्वाभाविक रूप से जुड़ी हुई दिखती है. हर बात साफ-साफ नहीं कही जाती, कुछ सच्चाइयां धीरे-धीरे समझ में आती हैं. जैसे लंबा चलने के बाद पैरों में मिट्टी चिपक जाती है, वैसी ही सच्चाई हर फ्रेम में नजर आती है.

2. आर्या (2004)

एक ऐसी प्रेम कहानी, जो आम फिल्मों से बिल्कुल अलग थी और चुपचाप शुरू होकर सब कुछ बदल गई. सुकुमार की सोच से निकली ‘आर्या’ ने प्यार को ऐसे अंदाज़ में पेश किया, जैसा पहले नहीं देखा गया था. इसमें कोई आम हीरो नहीं था, बल्कि एक सच्चा, अलग और खुले दिल वाला किरदार सामने आया. हर सीन में भावनाएं साफ झलकती हैं, जो बिना ज़ोर डाले दर्शकों को अपनी ओर खींच लेती हैं. युवाओं को इसमें अपनी झलक दिखी, जैसे कोई उन्हें समझ रहा हो. समय बीत गया, लेकिन यह फिल्म आज भी लोगों के ज़ेहन में ताज़ा है.

3. 1: नेनोक्काडिने (2014)

अपने समय से आगे की सोच और साहसी अंदाज़ के साथ, 1: नेनोक्काडिने ने आम रास्ता अपनाने से इनकार किया. तय फार्मूले में बंधे बिना बनी यह मनोवैज्ञानिक थ्रिलर जोखिम के दम पर आगे बढ़ी. सुकुमार की कहानी में गहराई थी, वहीं महेश बाबू की अदाकारी ने उनके किरदार को और मजबूत बनाया. तेलुगु सिनेमा की पारंपरिक सोच को मोड़ने के कारण इस फिल्म पर खूब चर्चा हुई. ऐसे प्रयोग बहुत कम देखने को मिलते हैं, जो दर्शकों को इतनी मजबूती से बांध पाएं.

4. 100% लव (2011)

इस फिल्म की खास बात यह थी कि यह हल्की-फुल्की और सहज लगी, जिससे सुकुमार का एक अलग पहलू सामने आया. भारी ड्रामे से दूर रहते हुए, इसमें प्यार, मुकाबला और घर के रिश्तों को खूबसूरती से जोड़ा गया. युवा दर्शकों को इसमें अपनी जिंदगी की झलक दिखी. बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म को साफ और लगातार सफलता मिली.

5. नान्नाकु प्रेमथो (2016)

हैरानी होती है कि बदले की कहानी होते हुए भी यह फिल्म अंदर से इतनी भावनात्मक लगती है. नान्नाकु प्रेमथो के संवाद सीधे दिल को छूते हैं, बिना ज़्यादा कोशिश के. टकराव कभी नकली नहीं लगे, क्योंकि वे सच्ची भावनाओं से निकले थे. इसकी खास बात यह है कि हर कदम के पीछे गहरा दिल छुपा है. सुकुमार ने जानी-पहचानी कहानी को नए अंदाज़ में पेश किया. परिवार के रिश्ते सिर्फ पीछे नहीं रहते, बल्कि हर सीन को आगे बढ़ाते हैं. एक साफ और सरल कहानी, अच्छे तरीके से कही गई, और ऐसी भावनाएं जो उम्मीद से अलग असर छोड़ती हैं.

आगे भी सुकुमार तेलुगु सिनेमा के भविष्य को नई दिशा दे रहे हैं. राम चरण की फिल्म ‘पेड्डी’ सुकुमार राइटिंग्स के बैनर तले उनकी रचनात्मक निगरानी में बन रही है, वहीं कार्तिक डंडू द्वारा निर्देशित और काफी समय से चर्चा में रही फिल्म ‘वृषकर्मा’ पर भी उनकी गहरी रचनात्मक छाप साफ दिखाई देती है.

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